Gopal Gupta

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हो गए हैं

नज़र के तेज़ ख़ंजर हो गए हैं।
दीवाने-ख़ाक मुज़्तर  हो गए हैं।।

शिकस्ता सारे मंज़र हो गए हैं।
तिरी चाहत में पत्थर हो गए हैं।।

करे शिकवा भला उन से कहो क्या।
 जफ़ा के  वो तो   मेहवर  हो गए हैं।।

कभी दिल में सनम था ठिकाना।
खुदाया अब तो बे-घर हो गए हैं।।

बुरे  हालात  ने  हम  को    दिखाया। 
 नज़र में किस कि कमतर हो गए हैं।।

गुलों  के  ज़ख्म   सीने  पर  हमारे।
कहू क्या अब जो मज़हर हो गए हैं।।

बुतों मे जान  फुक ने का हुनर रख ।
 ग़ज़ब  के  आप  आज़र  हो  गए हैं।।

ख़ुदा का है करम उन पर भी बहुत है।
जो  फिर  आदम   से  बंदर हो गए हैं।।

उसूलों मे ज़रा बदलाब लाओ।
पुराने  और  जर्जर  हो गए हैं।।

कभी  हँसती  थी हयात यहाँ पर।
महल  वो  आज  खंडर हो गए हैं।।


     Gopal Gupta "Gopal "

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4 Comments

Muskan khan

09-Jan-2023 05:55 PM

Well done

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Gunjan Kamal

09-Jan-2023 09:31 AM

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👌🙏🏻

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Sushi saxena

08-Jan-2023 06:56 PM

शानदार

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